IIT में एडमिशन के नाम पर ठगी, पुणे के दो फर्जी कॉल सेंटर पर छापा, 10 इंजीनियर गिरफ्तार

 

सोशल मीडिया के जरिए देश के नामी IIT-इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का मुंबई की पवई पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पुणे में चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं, जबकि इनमें पांच आरोपी B.Tech इंजीनियर हैं। गिरफ्तार 10 आरोपियों को 15 अगस्त को कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें 20 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

पुलिस उपायुक्त दत्ता नलावड़े के मुताबिक आरोपी Instagram, Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एडमिशन से जुड़े विज्ञापन जारी करते थे। इसके जरिए इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन की तलाश कर रहे छात्रों और उनके अभिभावकों का डेटा और मोबाइल नंबर हासिल किए जाते थे। इसके बाद आरोपी फर्जी नाम और फर्जी पहचान के जरिए उनसे संपर्क करते थे और देश के अलग-अलग प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का भरोसा देते थे। आरोपी खास तौर पर मैनेजमेंट कोटा और NRI कोटा में एडमिशन दिलाने का दावा करते थे। दिल्ली, हैदराबाद और देश के दूसरे शहरों के नामी इंजीनियरिंग कॉलेजों का नाम लेकर छात्रों और उनके परिवारों को भरोसे में लिया जाता था। PICT, NSUT, DTU और कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस ने बरामद किए हैं।

इस गिरोह की ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित था। पहले प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ली जाती थी और फिर एडमिशन की प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते थे। कुछ मामलों में आरोपियों ने छात्रों और उनके परिवारों को कॉलेज कैंपस तक ले जाकर भरोसा कायम किया। वे अभिभावकों से कॉलेज की कैंटीन में बैठने को कहते थे और खुद कॉलेज प्रशासन के अधिकारियों से मीटिंग करने के बहाने अंदर चले जाते थे। इस तरह पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि कॉलेज में उनकी सीधी पहुंच है।

पवई इलाके की एक महिला से उसके बेटे को IIIT हैदराबाद में एडमिशन दिलाने के नाम पर करीब 16.50 लाख रुपये की ठगी की गई। पुलिस के मुताबिक इस मामले में पीड़ित से एक साथ पूरी रकम नहीं ली गई, बल्कि एडमिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ अलग-अलग चरणों में पैसे लिए गए। पीड़ित से आखिरी भुगतान जुलाई के अंत में कराया गया था। पुलिस को शक है कि इस साल मार्च के पहले सप्ताह से जुलाई के अंत तक गिरोह ने बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों को निशाना बनाया। शुरुआती जांच में करीब 30 से 35 लोगों के साथ ठगी किए जाने का संदेह है।

14 अगस्त को पवई पुलिस की टीम ने पुणे के Neon Homes, वडगांव शेरी-लोहगांव इलाके में छापेमारी की। इसके बाद City Vista, खराड़ी स्थित दूसरे कॉल सेंटर पर भी कार्रवाई की गई। दोनों जगहों से कुल 22 मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, JioBook, डेबिट कार्ड, 23 सिम कार्ड और कॉलेजों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। आरोपियों की तलाशी में भी मोबाइल फोन मिले। पुलिस ने दो कॉल सेंटर से जुड़े वाहनों को भी जब्त किया है। इनमें BMW, Jaguar और Ciaz जैसी गाड़ियां शामिल बताई गई हैं। कुल जब्त संपत्ति की कीमत करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम को अलग-अलग तरीकों से निकाला जाता था। आरोपी नकद रकम लेते थे, ATM और POS मशीनों के जरिए पैसे निकालते थे और जांच में क्रिप्टोकरेंसी में रकम लगाने की बात भी सामने आई है।

यह नेटवर्क कम से कम वर्ष 2024 से सक्रिय था। जांच में अब तक मुंबई, नागपुर, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात समेत अलग-अलग राज्यों में दर्ज छह मामलों से इस गिरोह का कनेक्शन सामने आया है। गिरफ्तार सभी 10 आरोपी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं। इनमें पांच B.Tech इंजीनियर हैं, जबकि बाकी आरोपी भी इंजीनियरिंग से जुड़े बताए जा रहे हैं। गिरोह का मुख्य आरोपी करीब 35 साल का बताया जा रहा है।

मुख्य आरोपी सोनू कुमार समेत शुभम शर्मा, तुषार सैनी, सात्विक सिंह, दीपेंद्र प्रजापति, सौरभ सिंह, किशोर शर्मा, प्रांजल सिंह, देवेंद्र सिंह और सौरभ कुमार को गिरफ्तार किया गया है। अन्य आरोपियों की उम्र 23 से 30 वर्ष के बीच है। इनमें चार आरोपी बिहार, चार उत्तर प्रदेश, एक हरियाणा और एक झारखंड का रहने वाला है।

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